स्कूल की राह पर निकलने से पहले सृष्टि ने बाँटी ‘उम्मीद ’स्कूल जाने से पहले जरूरतमंद परिवारों के बीच बाँटे साफ-सुथरे पुराने कपड़े।
जरूरतमंदों के तन पर कपड़े, चेहरों पर मुस्कान और दिलों में इंसानियत भर गईं नन्हीं सृष्टि
फरीदाबाद। कहते हैं, समाजसेवा की कोई उम्र नहीं होती—जरूरत होती है तो बस एक संवेदनशील दिल की। इसी बात को चरितार्थ कर रही हैं फरीदाबाद की नन्हीं बाल समाजसेविका सृष्टि गुलाटी, जिन्होंने आज सुबह स्कूल जाने से पहले अपना कुछ समय जरूरतमंद परिवारों के नाम कर दिया।
प्रातःकाल जब शहर अपने रोजमर्रा के कामों की ओर बढ़ रहा था, उसी समय सृष्टि ने फरीदाबाद हरियाणा के प्याली चौक, डबुआ चौक और आयशर चौक के आसपास के स्लम क्षेत्र में जरूरतमंद लोगों के बीच साफ-सुथरे और अच्छी स्थिति वाले पुराने कपड़े वितरित किए। सृष्टि ने केवल कपड़े नहीं बाँटे, बल्कि हर परिवार के साथ अपनापन और सम्मान का भाव भी साझा किया।
तस्वीर में सृष्टि एक जरूरतमंद महिला को कपड़े सौंपती हुई नजर आ रही हैं। उनके चेहरे की मुस्कान और महिला के हाथों में कपड़े—यह दृश्य अपने आप में इंसानियत, करुणा और सेवा की एक खूबसूरत कहानी कह रहा है। सुबह स्कूल जाने से पहले कुछ समय जरूरतमंदों के नाम करना यह संदेश देता है कि समाजसेवा के लिए किसी विशेष अवसर का इंतजार नहीं करना चाहिए।
“जो हमारे लिए पुराना है, वह किसी के लिए नई उम्मीद हो सकता है”
सृष्टि का संदेश बेहद सरल लेकिन दिल को छू लेने वाला है—घर में रखी ऐसी वस्तुएँ जिनकी अब हमें आवश्यकता नहीं है, उन्हें बेकार छोड़ने के बजाय किसी जरूरतमंद तक पहुँचाया जाए। एक परिवार के लिए अनुपयोगी कपड़ा दूसरे परिवार के लिए सम्मान के साथ जीने का सहारा बन सकता है।
🏫 पढ़ाई के साथ संस्कार और समाजसेवा भी जरूरी
सृष्टि डी सी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा हैं। विद्यालय की ओर से भी उनके इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा गया कि बच्चों की शिक्षा केवल पुस्तकों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए। कक्षा में ज्ञान प्राप्त करने के साथ-साथ बच्चों को सामाजिक जीवन में आगे बढ़ना, जरूरतमंदों की सहायता करना और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझना भी सीखना चाहिए।
विद्यालय की भावना है कि सृष्टि जैसे बच्चों की सकारात्मक पहल अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरित करती है। छोटी उम्र में समाज के प्रति संवेदनशीलता दिखाना उनके अच्छे संस्कारों और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में एक सुंदर कदम है।
🌱 नन्हीं उम्र, बड़ा दिल
सृष्टि का यह प्रयास हमें याद दिलाता है कि समाज में बदलाव हमेशा बड़े कदमों से नहीं आता। कभी-कभी एक जोड़ी कपड़े, एक छोटी-सी मदद और चेहरे पर सच्ची मुस्कान भी किसी के जीवन में बड़ी खुशी ला सकती है।
सृष्टि ने स्कूल जाने से पहले जो किया, वह सिर्फ कपड़े बाँटने की घटना नहीं, बल्कि समाज को बाँटने के बजाय खुशियाँ बाँटने का संदेश है।
ऐसी नन्हीं कोशिशों को सलाम, जो किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान बनकर उतरती हैं
